Wednesday, November 30, 2016

कल से पेट्रोल पंप पर नहीं चलेंगे 500 के नोट

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नोटबंदी पर रोज नियम बदल रही केंद्र सरकार ने लोगों को एक और झटका दे दिया है। 500 के पुराने नोट 2 दिसंबर के बाद अब पेट्रोल पंपों पर नहीं चलेंगे, इसके अलावा इन नोटों से एयरलाइन टिकट भी कल तक ही खरीदे जा सकेंगे। 
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बता दें कि पहले केंद्र सरकार ने तय किया था कि पेट्रोल पंप और सरकारी अस्पतालों सहित जरूरी जगहों पर 500 के नोट 15 दिसंबर तक चलाए जा सकेंगे लेकिन सरकार ने अत्प्रत्याशित निर्णय लेते हुए लगभग दो हफ्ते पहले ही इन पर रोक लगाने का निर्णय ले लिया। 
बता दें कि 1000 के नोटों को सरकार पूर्व में ही पूरी तरह बैन कर चुकी है। इन्हें केवल बैंकों में ही जमा कराया जा सकता है।

Tuesday, November 29, 2016

मोदी सरकार के सत्ता में आते ही Swiss Bank में जमा भारतीयों का धन घटा !

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अब नई रिपोर्ट के अनुसार Swiss Bank में भारतीयों की कुल संपत्ति में करीब एक तिहाई की गिरावट आई है। ब्लैक मनी के खिलाफ बढ़ते अभियान का असर कहें या फिर मोदी सरकार का डर या फिर कुछ और ही, स्विटरलैंड के बैकों में रखे गए भारतीयों के पैसों में रिकॉर्ड गिरावट दर्ज की गई है, स्विटरजरलैंड के केन्द्रीय बैकिंग प्रॉधिकरण के ऑकड़ों के अनुसार साल 2015 के आखिर में भारतीय लोगों का धन लगभग 120 करोड़ स्विस फ्रैंक यानि करीब 8,392 करोड़ रुपये था।
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अब नई रिपोर्ट के अनुसार वहां भारतीयों की कुल संपत्ति में करीब एक तिहाई की गिरावट आई है, साल 2014 के आखिर में ये रकम 177.6 करोड़ स्विस फ्रैंक थी, जो की साल 2015 के आखिर में घटकर 120 करोड़ स्विस फ्रैंक रह गई। मालूम हो कि साल 1997 में स्विस बैकों में भारतीय लोगों ने पैसा रखना शुरु किया था, विदित हो कि मोदी सरकार बनने के बाद लगातार दूसरे साल यहां जमा कराये जा रहे पैसों में गिरावट देखी गई है।

ज्ञात हो कि साल 2006 में यहां सबसे अधिक पैसा जमा था, सूत्रों का अनुसार साल 2006 में यहां करीब 23 हजार करोड़ रुपये से भी ज्यादा जमा था। उसके बाद से यहां जमा कराये जा रहे धनों में लगातार गिरावट हो रही है, हलांकि साल 2011 और 2013 में भारतीयों ने अपने अकाउंट में खूब पैसा डाला, विदित हो कि साल 2011 में भारतीयों के धनों में 12 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई, तो साल 2013 में रिकॉर्ड 42 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई।

2014 लोकसभा आम चुनाव में काला धन भी बड़ा मुद्दा था, सभी पार्टियां इसे लेकर तरह-तरह के वादे कर रही थी, योगगुरु स्वामी रामदेव ने कालेधन को लेकर बड़ा आंदोलन भी किया था, हलांकि इस दिशा में केन्द्र की मोदी सरकार प्रयासरत है, लेकिन जिस तरह के वादे जनता से किये गए थे, वैसे परिणाम देखने को नहीं मिले। एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए तत्कालीन पीएम उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी ने कहा था कि काले धन वो लेकर आएंगे, काले धन से हर परिवार को करीब 15 लाख रुपये मिलेंगे।

आज की सबसे बड़ी खबर :भारत में अवैध बांग्लादेशियों को वापस भेजने का ये है मोदी का मास्टर प्लान !!

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हाल ही में देश के लिए एक और सबसे बेहतरीन खबर सामने आयी है जो की काफी लाभदायक साबित होने वाली है ।जैसा की हम सब इस बात से अवगत हैं बांग्लादेश से भारत में करोड़ों की संख्या में घुसपैठिये आ बैठे हैं जो की अब भारत के प्रवासी लोगों का हक छीनने में तुले हुए हैं , जिसकी वजह है की पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बेनर्जी का मुसलमानों के प्रति खास लगाव जिसका कारण केवल वोट बैंक है ।

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पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री की दी हुई खुली छूट के वजह से ही आज ये स्थिती है की भारत में करोड़ों की तादाद में घुसपैठिये आ बैठे हैं जिसके कारण भारतीय हिंदुओं की संख्या इन इलाकों में काफी कम होती जा रही है । इसी वजह से मोदी सरकार में एक बेहद सख्त कदम उठाते हुए इस फैसले को लेने की पूरी समभावनाएँ हैं की भविष्य में हो सकता है की भारत में रह रहे बंगलादेशी घुसपैठियों को निकाल बाहर करने के लिए कोई बहुत ही सख्ग्त कदम उठाए ।

खुशखबरी : आपके बैंक अकाउंट में इतना पैसा डालने जा रहे हैं PM मोदी !

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नोटबंदी से बेहाल आम लोगों को सरकार जल्द बड़ी वित्तीय राहत दे सकती है। नोटबंदी से सरकारी खाते में 2.5 लाख करोड़ से 5 लाख करोड़ रुपए तक आने की संभावना है। ऐसे में यह कयासबाजी जोर पकड़ रही है कि इस बिग टिकट रिफॉर्म से खराब हुई अपनी छवि को चमकाने के लिए सरकार आम लोगों के खातों में करीब 15 हजार रुपए ट्रांसफर कर सकती है।
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नोटबंदी के बाद जनधन खातों में काफी रुपया जमा हुआ

सूत्रों ने बताया कि सरकार जनधन खातों में पैसे ट्रांसफर करने पर गंभीरता से विचार कर रही है। और अगर ऐसा होता है तो कुल 25.4 करोड़ जनधन खातों में से 80 फीसदी खाताधारकों को इसका फायदा मिल सकता है। इससे सरकार के राजनीतिक ही नहीं, आर्थिक मकसद भी पूरे होंगे। चुनाव के साथ ही फाइनेंशियल इन्क्लूजन प्रोग्राम भी सरकार के लिए अहम हैं। एचडीएफसी के चीफ इकोनॉमिस्ट अभीक बरूआ ने पत्रिका को बताया कि सरकार का मकसद लोगों को यह बताना भी हो सकता है कि कालेधन की कमाई वह अपने पास नहीं, बल्कि आम लोगों को दे रही है।

किन लोगों को मिलेगा लाभअधिक संभावना जीरो बैलेंस खाताधारक परिवार को इसके लाभ मिलने की है। देश में इस समय लगभग 25 करोड़ परिवार हैं। सरकार तय करेगी कि सभी जनधन खातों को मिलना चाहिए या फिर एक परिवार के एक ही खाते को। सिस्टम में लगभग 17 लाख करोड़ रुपए सर्कुलेशन में हैं। इनका 86 फीसदी हिस्सा यानी लगभग 14.5 लाख करोड़ रुपए 500 और 1000 रुपए के नोट हैं। इनमें से 8 लाख करोड़ रुपए नोटबंदी के बाद डिपोजिट के रूप में बैंक में जमा हो चुके हैं। अधिक संभावना है कि 5 लाख करोड़ रुपए तक बैंकिंग सिस्टम में वापस नहीं आए। इन्हें आरबीआई डिविडेंड के रूप में सरकार को दे देगी। सरकार इन्हीं रुपयों का एक हिस्सा खाता धारकों का देगी।

क्या है कानूनी पेंचबरूआ के अनुसार, वास्तव में आरबीआई की ओर से जारी हर एक रुपए के प्रति उसकी लायबिलिटी बनती है। ऐसे में अपनी लायबिलिटी में कमी को डिविडेंट या प्रॉफिट बताकर सरकार को ट्रांसफर करने में कुछ कानूनी पेंच आ सकता है। आरबीआई के पूर्व गवर्नर डी सुब्बाराव ने इसके प्रति चेताया भी है। इसे चुनौती देने वाले कुछ पीआईएल दायर होने की भी खबर है। अगर पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम जैसे लोग पीआईएल दायर करें तो सरकार के लिए मामला आसान नहीं रह जाएगा। सरकार ने इसे डिमॉनेटाइजेशन नहीं बताकर डिलीगेलाइजेशन नाम दिया है। बाकी मनी ट्रांसफर को सरकार सब्सिडी बता सकती है। इस मामले में कोई परेशानी शायद नहीं आएगी।